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कल


कल

कल और आज कि बात लिखूं
कल मेरा था तेरा आज लिखूं

कल था काटों का ये ताज मेरा
आज तेरे लिये उन्हें फूलों के साथ बुनो

कल कोशिश थी मैंने मंजिल कि
आज तेरे लिये वो निगाहबान बने

कल तेरे लिये मैं बदलता रहा पल पल
आज बदला कल हो निछावर तुझ पर

कल कश्मकश भरा था जीवन मेरा
आज वो तेरी सरलता की राह बने

कल देखे थे सपने जो तेरे लिये
आज तेरे लिये वो हकीक़त बने

मै तो कल हूँ आज है तू
खो ना जाना तू आज में कंही

तु भी तो होगा इस कल का हिस्सा
वो कल आज मेरा कल तेरा होगा

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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