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एक अलग दिल


एक अलग दिल

एक अलग दिल है जो
जो धड़कता ही रहा
एक अलग दिल है जो

कभी अपनों के लिये ……… २
कभी गैरों के लिये वो मचलता ही रहा
एक अलग दिल है ……

सांस बाँध रखी
उसने इस सुबह से
उस नई सुबह के लिये

एक अलग दिल है जो
जो धड़कता ही रहा
एक अलग दिल है जो

वो तड़पता ही रहा
अपनों के उस मकाम
उस मकान के लिये

कभी अपनों के लिये ……… २
कभी गैरों के लिये वो मचलता ही रहा
एक अलग दिल है ……

राह वो अनचाही
वो अनजानी मंजिल के लिए
वो बस चलता ही रहा

एक अलग दिल है जो
जो धड़कता ही रहा
एक अलग दिल है जो

बुझे दीपक को
मन के तरंगों से जो
वो रोशन करता ही रहा

कभी अपनों के लिये ……… २
कभी गैरों के लिये वो मचलता ही रहा
एक अलग दिल है ……

मील जाये तुम्हे
या दिख जाये कभी तुम्हे वो राहों में
बस एक निगाह उस आँखों में देखकर जी लेना

एक अलग दिल है जो
जो धड़कता ही रहा
एक अलग दिल है जो

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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