ADD

नारी कभी तो


नारी कभी तो

एक पथ में
अनेक रहें जुड़ी
फिर भी अकेली

क्यों खड़ी ऐसे
वो रहें उसकी
किसके इंतजार में

कवायद दिन रात
एक अनसुलझी सहेली
कैसी वो पहेली

ममता छांव कि
अपने गांव कि
प्रियतम प्रेम कि

बांहे फ़ैली हुयी
सुनी गलियों खड़ी
अब भी मिलेगी

वो अंधेरा छटेगा
किरण पौ फटेगा
उसके अन्धकार में

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ