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तिरंगा मेरा


तिरंगा मेरा

हाथों में ना
बस तू ऐसे थाम ले
दिल का दराज
तू अपना खोल दे
तिरंगा है मेरे देश का
इन तीन रंगों को
अपने जिस्म में
इस कदर उतार ले
हाथों में ना
बस तू ऐसे थाम ले

बहना चाहिए
लुह बनकर नस नस में
वंदे मातरम वंदे मातरम
हर रग रग में से
जोश का यूँ ही संचार कर
भारत माँ पर अपना
शीश निछावर कर
हाथों में ना
बस तू ऐसे थाम ले

फूल बनकर
तू खिल इस तरह
सुगंद तेरी चहुँ और हो
फैला दे इस जंहा में
सुनहरा तमगा मेरे देश का
तू है तो मेरा देश है
मेरा देश है तो हम हैं
हाथों में ना
बस तू ऐसे थाम ले

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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