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लौटेंगे वो कदम


लौटेंगे वो कदम

पहड़ों में छूटे मेरे , लौटेंगे वो कदम
मुझे और मेरी , कल्पना को इंतजार है

सच होगी वो ,मेरी वो कल्पना
जिसका तू ने था ,ताना बाना बुना

ओ मूरत तेरी ,हर जगह सूरत तेरी
हो बसे तुम मेरे,इस दिल में कंही

सपने मेरे ,वो हकीकत तेरे
आँखें खुले ,तो सब बिखरे हुये

बसा हूँ वो कहे ,वो मुझ में कंही
दूर जा के खोजा, उसे पाया मुझ में यंही

यादों और तजुर्बे में , छिड़ी सोच में
ख्यालों का उड़ा, वो उड़न खटोला मेरा

बैठा हूँ अकेले , साथ कल्पना मेरी
अब भी बुन रहा हूँ, मेरा पन्ना खाली पड़ा

लौटेंगे वो कदम, जो अब थक गये
खुले थे हाथ मेरे , उसके अब भी फैले हुये

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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