जिंदगी रोज
जिंदगी रोज एक नया इम्तिहान लेती है
बीते पल पल का एक एक हिसाब लेती है
किसी को दे देती है कुछ ना मांगे वो फिर भी
किसी को दाने दाने को मोहताज करती है
कोई ख़ुशी में भी दुःख से दूर ना रह पाता है जिंदगी
कोई जीवनभर दुःख में रहने पर भी सुख से मर जाता है
क्या असर है क्या आयाम है तेरा ये जिंदगी
हसरत भरी निगाहें फिर भी तुझको देखा करती हैं
बादलों कि आड़ लिये झुरमुट के बीच संग जिंदगी
गाता है गीत कोई महफिल में कोई लिखता है उसे तन्हाईयों मे
अक्सर ये होता है मगर ऐसा होता क्यों है
आइने फलक में लिखा एका एक सब मिट क्यों जाता है
आना जाना यंह पर चला है चलता ही रहेगा जिंदगी
जाके किसी को भी पूछ लो कि क्या फलसफा था उसका
ना उम्मीदी और बस एक आस पड़ी मिलेगी वंहा पर
तू जो जिस राहा आया जिस रहा से चला जायेगा
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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