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ये जिंदगी


ये जिंदगी

ये जिंदगी
सिखाती देती है
ये जिंदगी
पड़ा देती है
रोना जिंदगी हँसना जिंदगी है
चलना दौड़ना जिंदगी में
ये जिंदगी
सिखाती देती है

अकेले में मिला जाती है
अपनों से बेगाना कर जाती है
तो कैसी है जिंदगी
पालूं तुझे तो
तू खो जाती है कंही
ये जिंदगी
सिखाती देती है

सवेरे शाम साथ रहती है
रातों में भी तू पास रहती है
निराशा कभी आशा है
कोई नही जाने
तेरी परिभाष सही
ये जिंदगी
सिखाती देती है

सांसों से तेरा मेल कैसा
धड़कन से क्या खेल तेरा
मस्तिष्क जुडी है क्यों ऐसे
ह्रदय नसों से गुजरी रेखा
मिले ना मिले तू
ये जिंदगी
सिखाती देती है

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http:// balkrishna_dhyani.blogspot.com
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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