वो प्रेम दीपक
जिंदगी के हैं दो दिन
बस प्यार में गुजार दे
ना बैठ यूँ उदास यार
बस प्यार में गुजार दे
भला ना कर सका किसी का
ना कर बुरा तू भूल में भी किसी का
ना बन सका तेरा रहबर कोई
अकेला ही रहबर बन जा सभी का
ना सोच इतना यार
बस प्यार में गुजार दे
रोना नही हँसना है यंहा
बस प्यार में गुजार दे
पतझड़ की बहार बन जा
बसंत की हो वो जैसे प्रेम फुहार
अंग लगाये ना कोई तुझे यंहा
ले ले तू आलिंगन में सारा संसार
दीप ऐसे जला यार
बस प्यार में गुजार दे
बुझा ना सके वो प्रेम दीपक कोई
बस प्यार में गुजार दे
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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