पता था तुझे
पता था तुझे ,दुनिया गोल है
पता था तुझे ,ना जिंदगी का कुछ मोल है
फिर भी ना जाने क्यों ,ये नियत तेरी खोटी है
इतना तू हरी ,इस हरी कि माया नगरी में
लूट है छूट है,पता था तुझे ये भी
सब खुदा ने रचा,ये भी था पता तुझे
फिर भी ,ना जाने क्यों तू
उस राह ना चला ,जंहा बसा था खुदा
पता था तुझे,वो सब मिला जब छूटा जायेगा
हाँ पता था तुझे,तेरे हाथों से एक दिन टूटा जायेगा
भुला बस भुला,अब उस नूर को तू
माँ पिताजी चेहरे , अब टपका और आकर हुआ गीला
उनका साथ भी रूठ जायेगा कुछ पल बाद छूट जायेगा
घूम कर वो वक्त, तुझ पर भी आयेगा पता था तुझे
पता था तुझे ,दुनिया गोल है
पता था तुझे ,ना जिंदगी का मोल है
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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