ADD

इन्तजार तेरा रहेगा


इन्तजार तेरा रहेगा

चकबंदी है
एक अधिकार है एकत्रीकरण का
घनीभवन करनी है इस मातृ भूमि की
पहड़ों से टूटने का दर्द
क्या होता है
अपनों से छूटने का मर्ज़
क्या होता है
तुझे क्या पाता ? , तुझ पे गुजरी है क्या

हाँ मुझे चाहिये चकबंदी
इससे हटेगी मेरे पहाड़ों की मंदी
खिलेगा फूलेगा ये पहाड मेरा
मिलेगा फिर से मुझसे प्यार मेरा

चकबंदी ने राह दिखाई
तू कहाँ.....कहाँ है मेरे भाई
देख दिल ने फिर ऐ आवाज लगायी
पहड़ों पहाड़ों से टकरा के आयी

गरीब क्रांति ने आस जगाई
फिर मुझे उस ने मेरी रूह से मिलायी
अपनों की फिर याद आ गयी
कदम चलने लगे दूँ की राह अपने आप

आठ मार्च बस इतना याद रखना
मैं तो चल पड़ा हूँ
अब कब आप का चलना होगा
पर इन्तजार तेरा फिर भी पहाड़ करेगा

चकबंदी है मेरे पहाड़ के लिये
मेरे खेती और मेरी बहार के लिये
आना जरूर
इन्तजार तेरा रहेगा

ये दिल धड़कता है बस अपने पहाड़ के लिये

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ