आच तुमरि खुद
आच तुमरि खुद...खुद भंडी खुद ऐई
यूँ अन्ख्युं को पाणी आच खुभ ....खुभ बौगी ग्याई
आच तुमरि खुद
कैल नि जाणि ... नि जाणि ई यकुली पीडा कु दर्द
मेरि विपदा की खैर... खैर बल मिल ई जाणि
आच तुमरि खुद
बैठी रयुं तुमरु रैबार बाण ....रैबार बाण कब भ्तेकी
पर नि ऐई क्वी रैबार ना तेर चिठ्ठी ना पत्री ऐई
आच तुमरि खुद
करनु छों हिसाब तुम याद आच कद्ग बारी आंयां
नि मौजी स्की आच त तुम याद बेहिसाब आंयां
आच तुमरि खुद
इं जीकोडी थे बथो दे बथो दे ऐकी यख एक बारी
बल रति इनि बीति ना तुम ब्याल ना आच आंयां
आच तुमरि खुद
आच तुमरि खुद...खुद भंडी खुद ऐई
यूँ अन्ख्युं को पाणी आच खुभ ....खुभ बौगी ग्याई
आच तुमरि खुद
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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