होली हो
आयो फागुन रंग को
किरीमची केसरी संग को
देखा रया उड़े रंग को
मन मेरु व्है गे दंग को ……२
अच होली हो होली हो होली रे … २
अच होली हो होली हो होली रे ऐ जा
लगाऊ रंग को ...माय ले
भीगी गे मन अब तेरु छैया रे
कन उल्यार ऐगे ये पहाड़ रे
ढोल दामो मसो बाजो बाजा रे ……२
अच होली हो होली हो होली रे … २
अच होली हो होली हो होली रे ऐ जा
बुरांस लाल प्योंली पिंगली
रंगी गे ख़ुशी दगड अब रंग हजार
देके ले हर एक चौदिशा दिशा मा
प्रेम को सबी जगी अच पसरी मौल्यार
अच होली हो होली हो होली रे … २
अच होली हो होली हो होली रे ऐ जा
जख तख देकी ले वख वख रंग च
रंग का दगड दगडी ख़ुशीयां मंगल च
हेर मेर मनखी मा हरी हरी रंग च
ये पानी दगडी भीगी रा अपरू तन च
अच होली हो होली हो होली रे … २
अच होली हो होली हो होली रे ऐ जा
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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