ADD

नये चखुला कु उड़णा कु


नये चखुला कु उड़णा कु

प्रीत कै पैली पत्री लिखणा कु बगत त लगदु च
नये चखुला कु उड़णा कु बगत त लगदु च

सरीर की छविं निच जी ऊँका जिकड़ी जाणा छे
भंडया दूर जाणू बान बगत त लगदु च

गेड अग्र पौडी जैये त फिर कुटुमदरी हु या लगळु
लाख ताक़त लग्यां सुटणा बान बगत त लगदु च

हमुन इलाज -ऐ - जक्म-ऐ -जिकोड त ढुंढी लियां जी
खोळ जक्म ते भरणा बान बगत त लगदु च

कन यखुली व्हैगै सैरौ गढ़देश तुमर जाणा बाद
अपरा गयां ऊँ थे परती आणु बाण बगत त लगदु च

प्रीत कै पैली पत्री लिखणा कु बगत त लगदु च
नये चखुला कु उड़णा कु बगत त लगदु च

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ