बौल्या मना
बौल्या मना रे बौल्या मना
नि जाणा पाई तिल
नि खाण पाई दोई घास सुखा का
बौल्या मना रे बौल्या मना
बिरड़ी रे तू अटगी तू
कै खोला रौला मा कै बांजा अंजाडू
क्द्गा अपरा अजाणा मा
बौल्या मना रे बौल्या मना
कण परित ब्यालिगे
ब्योलि जन शर्मिगे आँखा की छूईं तेरी
यकुली तू तेर कैन ना बिंगी रे
बौल्या मना रे बौल्या मना
माया तेरी ई बौली ही राई
ऐई दगड तेरु तेरु दगड ही गैई
जिकोड़ी मेरी यख माया लगै कया पाई
बौल्या मना रे बौल्या मना
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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