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अपरा पहाड़ों कख हम


अपरा पहाड़ों कख हम

अपरा पहाड़ों कख हम बस अब अपरा सैरा को हम छों
ऐ गै दुवी घढ़ी कु यख बथों की बयार जण अब हम छों

पैल कुच बी नि छे बल पर सब अपरू अपरू लगदु छा
अब अपरा ही घार मा देका कण बिराणा सा वहगै हम

बगत दगडी माटु दगडू झनि कख क और्री कबै भति छे
कै थे पत्ता छे हम थे क्ख्क और्री कै पट्टी का हम छों

हिट दा रैंदा की हिटणा ही अब ये मेरु ये भाग्य छ
खोज्दा रैंदा अब ऊ बाटा कै बाटू धरूँ कु हम छों

ऐ जांदी खुद अब बी सब बोगी ले जांदी न्यार अब बी छे
यकुली मा यकुलांस मा दाड़ी वो तेर याद अब बी छे

अपरा पहाड़ों कख हम बस अब अपरा सैरा को हम छों
ऐ गै दुवी घढ़ी कु यख बथों की बयार जण अब हम छों

एक उत्तराखंडी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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