पहाड़े की बांद तू
कन मीठी मीठी छविं
व मै दगडी लगांद
पहाड़े की बांद तू
मेरु दिल लुची जांद … २
सेब जनि मुखडी लाल
जनि खिल्यांद
पहाड़े की बांद तू
मेरी भली दिख्यांद … २
अपरी हैंसी कथा दगड
तू मीथे हास्यांद
पहाड़े की बांद तू
अपरू दुक बिसरी जांद … २
घास को चौंफा
जनि वा मीथै बिटयांद
पहाड़े की बांद तू
मीथै मोंड मा बांदी ले जांद … २
पीड़ा विपदा कया च
ऊँ दगड तू बच्यांद
पहाड़े की बांद तू
यकुली सैरी खैरी सरयांद … २
खुद थे बी तेरी खुद आंद
सुपनियुं मा ऊ हैरा भैरा बाटा
पहाड़े की बांद तू
मेरु हाथ पकडी ले जांद … २
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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