सारि उमरी तेरु बाटू हेरी की गुजरी ग्याई
सारि उमरी तेरु बाटू हेरी की गुजरी ग्याई
हेर हेरमा गेल्या मिल कै कैसे नि माया लगैई
कबी मिल तेर छँवि बुरांस भुलि ते सुनैई
कबी मिल घघुति दीदी दगडी तै रबैर पठैई
कबी चौक छाज कभी झिंगला धुरपाली मा
कै बाटू कै रौळु तेरु नौऊ लेकि दौड़ी नि लगैई
बाणों की घ्सेरी डाली मा दाती धारा घेरी मा
खदेड़ा गीतों का बोल ढोल दामों का थापों मा
कबीत मि अंधरों का कोना कोना मा रे गेल्या
बैठी बैठी की तेर स्वाणी कि मुखडी सुबेर द्यखी
कख कख मिल ते थे खोजी तेरु मिल खैल क़्याई
ये जीकोडी अंगोला मा तू सदनी यख बैठी राई
सारि उमरी तेरु बाटू हेरी की गुजरी ग्याई
हेर हेरमा गेल्या मिल कै कैसे नि माया लगैई
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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