मीथै सिखै दे बोई
अपरी भाषा अपरी बोली
मीथै सिखै दे बोई............. २
बिरडयूँ लग्युं छों मि अपरुँ मा ही
मीथै मेरु बाटू दिकै दे बोई
अपरी भाषा अपरी बोली
मीथै सिखै दे बोई............. २
ना बणी अब तक अ।...........
ना फुली पाई ….. २ कया करूँ मि
अपरूँ थें जैन ध्यान नि दे पाई
ना कैर भूल जब खिललु छूट फूल
वे थे सिके दै बोई
अपरी भाषा अपरी बोली
मीथै सिखै दे बोई............. २
लुप्त हुना कु कगार मा बैठीं चा
यकुली यकुली कै धार मा वा बैठीं चा
सिकी तिल सब अपरी भाषा नि सिक पाई
बल तेरी इनि उपहास मा वा यकुली बैठीं चा
ना इनि उपहास कैर ना बना विं था गैर
मीथै मेरु बाटू दिकै दे बोई
अपरी भाषा अपरी बोली
मीथै सिखै दे बोई............. २
अबी बी भुला नि व्हाई दैर
कुच ना कुच सोच कुच त तू फिकर कैर
सन २००० मि राज्य बानी गे छ
किले ने बानी मेरी बोळी भाष फिर.... अ
कैमा और्री कण लागलु आस फिर
अपरी भाषा अपरी बोली
मीथै सिखै दे बोई............. २
अपरी भाषा अपरी बोली
मीथै सिखै दे बोई............. २
बिरडयूँ लग्युं छों मि अपरुँ मा ही
मीथै मेरु बाटू दिकै दे बोई
अपरी भाषा अपरी बोली
मीथै सिखै दे बोई............. २
एक उत्तराखंडी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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