रुख़्सत हो जा
रुख़्सत हो जा
मेरी आँखों से वो आँखों का पानी
बह ना जा तू इस तरह बह ना जा
मेरे पहाड़ों से वो मेरी बहती जवानी
रुख़्सत हो जा
मेरी आँखों से वो आँखों का पानी
इस शाम को क्यों ऐसे ढलना था
क्यों इस सवेरे को पूरी रात जलना था
रुख़्सत हो जा
मेरी आँखों से वो आँखों का पानी
किरण इन्तजार की अब लौट आने दो
कली इन्तजार में ना अब मुरझाने दो
रुख़्सत हो जा
मेरी आँखों से वो आँखों का पानी
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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