मेरी अर्धांगिनी हो तुम
मेरी अर्धांगिनी हो तुम
इस दिल दर की स्वामिनी हो तुम
इस जीवन रूपी गाड़ी की गामिनी हो तुम
चले जब भी वो जब तुम चलोगे संग
रोशन है तुझ से ये रौशनी मेरी
कंधे से कन्धा मिला कर जब सोचेंगे हम
पीढ़ी से नयी पीढ़ी की सीढ़ी हो तुम
मै ताला दरवाजे का उसकी चाबी हो तुम
कहना है बस तुमसे तुम्हरे जन्म दिन पर मुझे
ध्यानी परिवार के खुशियों की रागनी हो तुम
मेरी अर्धांगिनी हो तुम
इस दिल दर की स्वामिनी हो तुम
जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई सरिता ध्यानी
बालकृष्ण डी. ध्यानी
बालकृष्ण डी ध्यानी


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