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आज पहाड़ों में जमकर हो रही बरसात


आज पहाड़ों में जमकर हो रही बरसात

आज पहाड़ों में जमकर हो रही बरसात
आ रहे हैं वो दिन मुझे फिर से याद

भीगा रहा है मौसम बरस के जंगलों में आज
दूर बैठा वो मन क्यों भीगे आज मेरे साथ

पत्तों पत्तों ने धारण कर लिया है नया श्रृंगार
मेरे पास आ रही किस की वो करुणा पुकार

डर भी लगता है जब गरजता ये सावन
तब अपनों की यादों में उलझ जाता ये मन

कैसे होंगे मेरे अपने ढूंढता है वो पल पल
वियोग की ये दशा दर्शाती है ये जल थल

आज पहाड़ों में जमकर हो रही बरसात
आ रहे हैं वो दिन मुझे फिर से याद

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी
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