शराबबंदी के लिये लड़ाई बेईमानी है
दारू ही दारू अब बिकेगी अब मेरे पहाड़ में
इस दारू के खिलाफ क्यों रोज लड़ रहे हैं हम इस पहाड़ में
बजार बजार में अब दारू की दुकाने खुलेंगी बिकेंगी
घुस लेकर देकर दून में अब आबकारी नीति जो यंहा बदलेगी
छलकेंगे जाम अब और रंगीन होगी उत्तरखंड की शाम
पहले ही टूटे हुये हैं इस बार तो हम चूर चूर हो जायेंगे
अपना कोई है जो इस गुलशन को इस तरह उजाड़ रहा है
देवभूमि को क्यों वो गन्दी राजनीती के खेल का शिकार बना रहा है
मेरी बेटी ब्वारी कब तक यंहा अकेली इस दारू के खिलाफ लड़ेंगी
हमारी आती जाती सरकारें ऐसे ही अपने चेहरे का रंग बदलेंगी
शराबबंदी के लिये लड़ाई यंहा पर बस अब बनी बेईमानी है
शराब के साथ जब इस तरह बहता वो रुपयों का पानी हो
दारू ही दारू अब बिकेगी अब मेरे पहाड़ में
इस दारू के खिलाफ क्यों रोज लड़ रहे हैं हम इस पहाड़ में
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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