रति आक्स मां
रति आक्स मां
ईं जुन्यालि रात मां
गैनो दगडी तेर बात मि कैन लग्यूं
तेर खुद मा मि अब रैणा लग्यूं
रति आक्स मा .......
यक्लु कख छों मि अब
तू छे अब मेरा आस पास मां
स्वास लेन्दु छों मि वा बी तेरा नौ का
इनि ही बैठी रै तू ज्यूंदगी भरी मेर साथ मां
रति आक्स मां .......
ये रति बीत जाली इनि बस तेरा साथ मां
देदे तू माया कि सौली मेर जिकोड मां
तेर फोट मिन कढ़ी च मेर आंख्युं मां
तेर बिगर अब को नि देखेंदु मि ये चाँद रात मां
रति आक्स मां .......
धक धक्याट ये जियू अब किले कैन लग्यूं
तेर बिगेर ये दिस राति बस ऐन जैन लगि
कब कटेली ये रात कब व्हाली तैसे मुलकात
बस ये आस थे मि आपरी दगडी बधेणु लग्यूं
रति आक्स मां .......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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