बस अपने पास पड़े हैं चार दिन
बस अपने पास पड़े हैं चार दिन
(और बाकी कुछ ना था ) ... २
अपना भी खोया था खोया रहा मैं
तमाम उम्र भर जागना था सोया रहा मैं
अब खुद से बेजार बेहिसाब होकर
(मैं हैरान हुआ हूँ परेशान हुआ हूँ )........... २
क्या करूँ मैं अब भी जानो ना
समझ को मैं अपनी पहचानो ना
बुत बनकर रह गया हूँ ये मैं क्या कह गया हूँ
हारा हूँ खुद से अब मैं
(जब मैं जीत ना पाया )... २
ऐसे अपनों ने खींचा मुझको
मेरी बस नकामियों से सींचा मुझको
मेरी अच्छाईयां ना दिखी किसी को
अपने बने चौखटे से
(ना उभर सका मैं )... २
बस पास पड़े हैं चार दिन ........
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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