देखे ले अपरी ये रस्वड़
देखे ले अपरी ये रस्वड़
कै दिन ये भूक तिस बुझांदी छे
अंख्यों मा लेकि लाडा पियार अ
वा तेथे धैय लगे की बुलान्दी छे
देखे ले अपरी ये रस्वड़ .....
दिख जालु टूटीयूँ चुल्लू को दिवाल
जैमा ब्वै रुटी सागा भात दाल पकन्दी छे
देखिलियां कमरा कूड़ का बी हाल
जख हैंसी रुवै की दिस बितान्दी छ्या
देखे ले अपरी ये रस्वड़ .....
याद छे ते चौक गोठ् पुंगड़ा डोखरी बाटा
ये भगयान अब कब हुलु अब वख जाणा
रुड़ि ह्यून्द कू पसरयूं हुलु वख उज्यल
मेरा भागा मा निच वै स्वर्गा की रस्याण
देखे ले अपरी ये रस्वड़ .....
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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