विंकी मुखडी
मुखडी मुखडी विंकी मुखडी ..... २
मि थे बुलाणी चा माया लगाणी चा
धैयै लगाणी चा आंख्युं आंख्युं बचाणी चा
मुखडी मुखडी विंकी मुखडी .....
विं मुखडी को जादू रैई ना में परी काबू
भैर भितर ऐथर पैथर अग्ने पिछने
वा मि थे ले जाणी चा बौल्या बनाणी चा
मुखडी मुखडी विंकी मुखडी .....
क्या करो मि थे कुच बी समझ ना ऐई
विंकी रूपा को मै पे जबै झौल पौड़ी ग्याई
ग्याई ग्याई मि तब मैसे ग्याई
मुखडी मुखडी विंकी मुखडी .....
रैंदु ना मि अब अपरा अपरुँ मां
ना गैल्युं मा ना कै अब बिरणु मां
नि जणदू मि मि थे ये कया रोग लगि ग्याई
मुखडी मुखडी विंकी मुखडी .....
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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