ADD

अपने को अनुभव कर ले


अपने को अनुभव कर ले

अपने को अनुभव कर ले
बंद हुये द्वार तेरे तू खुद खुल दे
पथ तेरा मिल जायेगा रे पथिक
दूर कहाँ तू फिर पास आ जायेगा रे पथिक

एक ज्योति है तू परमात्मा की
अपनी आत्मा में तू उसकी ज्योति खोज ले
निर निराले रंग दिखएगा वो तुझको
और अपने समीप में ले जायेगा वो तब तुझको

आत्म ज्ञान से यंहा बड़ा ना कोई
प्राप्त हो गया अगर तो फिर छोटा ना कोई
परम शांति जब मिल जायेगी तुझको
फिर मुक्तिधाम सदगति हो जायेगी तेरी

अपने को अनुभव कर ले ............

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार

बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ