अपने को अनुभव कर ले
अपने को अनुभव कर ले
बंद हुये द्वार तेरे तू खुद खुल दे
पथ तेरा मिल जायेगा रे पथिक
दूर कहाँ तू फिर पास आ जायेगा रे पथिक
एक ज्योति है तू परमात्मा की
अपनी आत्मा में तू उसकी ज्योति खोज ले
निर निराले रंग दिखएगा वो तुझको
और अपने समीप में ले जायेगा वो तब तुझको
आत्म ज्ञान से यंहा बड़ा ना कोई
प्राप्त हो गया अगर तो फिर छोटा ना कोई
परम शांति जब मिल जायेगी तुझको
फिर मुक्तिधाम सदगति हो जायेगी तेरी
अपने को अनुभव कर ले ............
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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