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बस भर्म था



बस भर्म था

बस भर्म था उनको मुझ पर
अब यकीन आ गया है उन्हें
मैं भी एक अच्छा इंसान हूँ ......

ध्यानी
बालकृष्ण डी ध्यानी
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