आज तू अपने गले लगा ले मुझे
आज तू अपने गले लगा ले मुझे
आज अपने से तू मिला ले मुझे
जो दिया है मुझे सब तेरा ही दिया
तेरे कदमो में आज बस ले मुझे
सबका मुकदर लिखने वाले बता
मेरे मुकदर में हो बस तू ये ही हो लिखा हुआ
कुछ और ना चाहिये मुझे तेरे सिवा
मुझको मिल गया तू अब मिलने को क्या बचा
माना तू है निरकार प्रभु मेरा
ये ही मंशा मेरी बस तेरी मुझे छबि दिखा
देख खो जाओ मैं तभी मैं तुझी में सदा
ये ज्योति तेरी मेरी ज्योति से मिला
शांति के धाम मेरी तू अशांति मिटा
पाप की रहा छोड़कर मुझे सदकर्म में चला
मुख में खोलों बस वो तेरी वाणी बने
सदा तेरे गुणगान में मेरी जिंदगानी चले
आज तू अपने गले लगा ले मुझे ......
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
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