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बस वो तड़प है


बस वो तड़प है

बस वो तड़प है और कुछ नहीं
जो अब तक हमे ज़िंदा रखी है
उस दर्द से हमे अहसास होता है
हम अब तक ज़िंदा हैं मरे नहीं

ध्यानी
बालकृष्ण डी ध्यानी
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