गरीबी
अब कोई आता नहीं
अब कोई जाता नहीं
देखा गरीबी का मौसम जब से
वो आता है पर जाता नहीं
गर्मी बन वो झुलसाएगी
बरखा बन वो भीग जाएगी
बसंत के मौसम में वो
पतझड़ सी गुजर जाएगी
दिल रखना इतना भरोसा
अपने पर से भरोसा ना खोना
दुःख का लगाकर बिछोना
तू सुख की नींद सो जाना
अकेला है सफर जाना
हमसफ़र का ना कर बहाना
अकेले चल कर अभी तुझे
ऐ गरीबी बहुत दूर तुझे जाना
अब तक ऐसा शहर नहीं बसा
जिसमे में मैं अकेला नहीं छला
चुपचाप तमाशाई दुनिया ने
ऐ गरीबी तुझे तुझसे किया जुदा
आसमान में उजले तारे वो
गर्दिश में आपने सितारे हों
टिमटिमाना ना ही हम भूलेंगे
ऐ गरीबी तेरे संग झूलेंगे
बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी
अब कोई आता नहीं
अब कोई जाता नहीं
देखा गरीबी का मौसम जब से
वो आता है पर जाता नहीं
गर्मी बन वो झुलसाएगी
बरखा बन वो भीग जाएगी
बसंत के मौसम में वो
पतझड़ सी गुजर जाएगी
दिल रखना इतना भरोसा
अपने पर से भरोसा ना खोना
दुःख का लगाकर बिछोना
तू सुख की नींद सो जाना
अकेला है सफर जाना
हमसफ़र का ना कर बहाना
अकेले चल कर अभी तुझे
ऐ गरीबी बहुत दूर तुझे जाना
अब तक ऐसा शहर नहीं बसा
जिसमे में मैं अकेला नहीं छला
चुपचाप तमाशाई दुनिया ने
ऐ गरीबी तुझे तुझसे किया जुदा
आसमान में उजले तारे वो
गर्दिश में आपने सितारे हों
टिमटिमाना ना ही हम भूलेंगे
ऐ गरीबी तेरे संग झूलेंगे
बालकृष्ण डी ध्यानी
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बालकृष्ण डी ध्यानी


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