ADD

मैं हंगामी पंछी


मैं हंगामी पंछी

उड़ने लगे हैं पंछी
छोड़ अपनी डाला को
आशियाना नया बसाने
ना जाने किस डाला पर

स्वार्थों ने मुझे भी
अब स्वार्थी बना डाला
थोड़ी सुविधा दिखी उस पेड़
असुविधा पेड़ छुड़ा डाला

हंगामी पंछी बन आता हूँ लौटकर
असुविधा हो जब सुविधा पेड़ पर
दो पल बैठक लगा अपनों के संग
उड़ जाता हूँ फिर सुविधा पेड़ पर

मैं हंगामी पंछी

बालकृष्ण डी ध्यानी
देवभूमि बद्री-केदारनाथ
मेरा ब्लोग्स
http://balkrishna-dhyani.blogspot.in/search/
http://www.merapahadforum.com/
में पूर्व प्रकाशित -सर्वाधिकार सुरक्षित
बालकृष्ण डी ध्यानी
Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ