भाग ३२
सुबेर-सुबेर घपरोल
" आजो गढवालि चुटकला" "
श्रीमती जी," चार दिन बिटिक भबताट मचायूं छ्याइ।बल मि लाइव जाणु छौं फेसबुक पर।अपणि बोलि अपणि भाषो प्रचार -प्रसार खुणि। क्या मिल तुमतें ? कति लुखु न द्य्याख?लोग बुलद त छैं ही नि छन अपणि भाषा। त सुण -दिखण कैन छ्याइ।"श्रीमान जी," जादा बकबास नि कैर। यू देख नौ सौ लुखुन देखि याल ( नाइन हुनडरेड व्यूज) सिर्फ द्वि दिन मा।"श्रीमती जी," नौ सौ लुखुन द्य्याख। जादा चौड़ू हुणा क जरुर्रत नि। मिन वै दिन ही आपर सेल्फि डालि त द्वि हजार लाइक। ऐसे बढिया मिते हि बैठालि दींद बगल मा त कम से कम तीन हजार लोग दिखद अर कमेंटस बि तुमार सौ जगा पर द्वि सौ आंद। समझि ग्याव। "श्रीमान जी," फिर त मेरि आवाज हि नि निकलण छै जू त बगल मा हुंद त । मि आपर कविता कनकै सुणांद। वखमि घपरोल कैरि दिंद त एडमिन डा० मैठाणी फट्ट बंद कैरि दिंद लाइव "श्रीमती जी," क्या ब्वाल ! मि घपरोल करदु। अब्बि मैठाणी भुला तें फून करदू हैंक दिन यूं ते ना बल्कि मिते बुलेैन लाइव। फिर दिखिन पेज क रिच।"श्रीमान जी," जादा नि बोल वू त म्यार कारण लाइक करदान कि कवि जीक श्रीमती च । वरना कैन लाइक करण छै सूपर्नखा शक्ल । "श्रीमती जी," आ हा। तैं खरड़ि खुपड़ि मा टुपला नि धरद त एक बि लेडिज लाइक नि हुंद। भौत अनुपम खैर समझदवा आफतें क्या।"श्रीमान जी," मिन त कुछ नि ब्वाल भै। जू तू म्यार मुण्ड तक पहुंचि गे।
श्रीमती जी," चार दिन बिटिक भबताट मचायूं छ्याइ।
बल मि लाइव जाणु छौं फेसबुक पर।अपणि बोलि अपणि भाषो प्रचार -प्रसार खुणि। क्या मिल तुमतें ? कति लुखु न द्य्याख?लोग बुलद त छैं ही नि छन अपणि भाषा। त सुण -दिखण कैन छ्याइ।"
श्रीमान जी," जादा बकबास नि कैर। यू देख नौ सौ लुखुन देखि याल ( नाइन हुनडरेड व्यूज) सिर्फ द्वि दिन मा।"
श्रीमती जी," नौ सौ लुखुन द्य्याख। जादा चौड़ू हुणा क जरुर्रत नि। मिन वै दिन ही आपर सेल्फि डालि त द्वि हजार लाइक। ऐसे बढिया मिते हि बैठालि दींद बगल मा त कम से कम तीन हजार लोग दिखद अर कमेंटस बि तुमार सौ जगा पर द्वि सौ आंद। समझि ग्याव। "
श्रीमान जी," फिर त मेरि आवाज हि नि निकलण छै जू त बगल मा हुंद त । मि आपर कविता कनकै सुणांद। वखमि घपरोल कैरि दिंद त एडमिन डा० मैठाणी फट्ट बंद कैरि दिंद लाइव "
श्रीमती जी," क्या ब्वाल ! मि घपरोल करदु। अब्बि मैठाणी भुला तें फून करदू हैंक दिन यूं ते ना बल्कि मिते बुलेैन लाइव। फिर दिखिन पेज क रिच।"
श्रीमान जी," जादा नि बोल वू त म्यार कारण लाइक करदान कि कवि जीक श्रीमती च । वरना कैन लाइक करण छै सूपर्नखा शक्ल । "
श्रीमती जी," आ हा। तैं खरड़ि खुपड़ि मा टुपला नि धरद त एक बि लेडिज लाइक नि हुंद। भौत अनुपम खैर समझदवा आफतें क्या।"
श्रीमान जी," मिन त कुछ नि ब्वाल भै। जू तू म्यार मुण्ड तक पहुंचि गे।


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