सन् 1988 का किस्सा है मुझे संपदा निदेशालय से नेताजी नगर, दिल्ली में सरकारी आवास आबंटित हुआ । मुझसे पूर्व उस मकान में कोई होम्योपैथिक डॉक्टर बंसल रहते थे। उनकी पत्नी को वह आवास मिला था लेकिन पत्नी के सेवानिवृत्त होने के कारण उन्हें खाली करना पड़ा.उनकी होमायोपथिक डाक्टरी वहाँ खूब चलती थी I दूर -दूर से मरीज उनके पास इलाज कराने आते थे I ऐसा मुझे वहाँ शिफ्ट होने के उपरांत पडोसी से पता चला। उस दो कमरों के मकान में उन्होने बरामदा और बाॅलकोनी कवर करके वेटिंग रूम एवं पेशेंट रूम बनवा रखा था I
शिफ्ट करने के दूसरे दिन से ही मेरी आफ़त आ गई I सुबह 6-7 बजे से ही घर की घंटी बजनी शुरू हो गई
" डॉक्टर साहब हैं, हम दो महीने से चक्कर लगा रहे हैं, गाज़ियाबाद से आते है।" बुजुर्ग दंपति सुबुह सात बजे दरवाजे पर खड़े थेI मैं कुछ बोलूं आदत अनुसार वो सीधे बरामदे में रखी कुर्सियों पर बैठ गये I इससे पहले कि मैं कुछ बोलूं दो और लोग आकर तख्त पर बैठ कर अपनी बारी का इंतजार करने लगे I
" अंकल जी, डॉक्टर साहब, अब यहाँ नहीं रहते, अब यह मकान मुझे मिल गया हैं " मैने उन लोगों से कहा I
" ऐसे कैसे चले गये , आपको पता है होमेयो का इलाज कितना लम्बा चलता है I" एक बोला .
तब तक 7-8 लोग बरामदा में बैठ चुके थे I
दो कमरो के मकान में मैं अपने बूढ़े माँ-बाप और पत्नी के साथ रहता था I
परेशान हो गया था, मैं इन मरीज़ो से, न सुबुह न रात, हर वक्त मरीज घंटी बजाकर मुझे तंग करते थे I पड़ोसी मदान साहब से बड़ी मुश्किल से डॉक्टर बंसल का फ़ोन नंबर मिला। मैने उसे दरवाजे पर लिख दिया I फिर लोग पूछते कि उनका पता तो बता दीजिये जो कि मुझे किसी पडोसी से नहीं मिला I
एक दिन जब बहुत तंग होकर मैने बड़ा सा बोर्ड लटका दिया " अब यहाँ मरीज रहते हैं डॉक्टर नहीं , कृपया डॉक्टर के लिए घंटी ना बजाए "
फिर लोग रात के 10बजे भी घंटी बजाकर पूछते " भाई, यो डॉक्टर मरीज नेै छड़ कित गायब हो गयो " और सलाह देने लग जाते , " क्या बीमारी है, कौन सा हॉस्पिटल अच्छा है आदि इत्यादि I
बहुत दिनों बाद डाक्टर बंसल का फोन लग गया। बोले अरे भाई सहाब एक पुण्य का काम और कर दो अपना बरामदा मुझे किराये पर दे दो मैं वहीं आकर अपने मरीज देख लिया करुंगा। मैं अभी यहाँ उनके बगैर खाली ही बैठा हूँ।
मैंने कहा डाक्टर सहाब मैं मकान ही बदल लूंगा जो आयेगा उस से ही बात कर लेना।
मैं उन मरीजों से इतना परेशान हो गया था कि मुझे "एफ" ब्लाक से "जी" ब्लाक नेताजी नगर में ही मकान शिफ्ट करवाना पड़ा


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